Deepesh' Blog

Just random……..

विश्व गुरु !!?!!

एक बार विदेश से कोई बोटनिस्ट ( वनस्पति वैज्ञानिक ) आया। उनका एक जगह भाषण होना था। मुझे बताया गया कि यह ‘फासिल ‘ का विशेषज्ञ है , यानि चट्टानों के बीच दबे हुए पौधे या जंतु के पाषाणरूप हो जाने का। मैंने उसका भाषण सुना और मेरे भीतर हलचल होने लगी। वह पश्चिम के वैज्ञानिको के नाम ही लेता रहा और विदेशो के ‘फासिल’ दिखाता रहा। उसके बाद मैं बोलने को खड़ा हो गया। मैंने कहा – आज हमने एक महान ‘बाटनी ‘ का भाषण सुना। (बाद में मुझे बताया गया कि वह बॉटनिस्ट कहलाता है ) मैं आपसे पूछता हूँ कि क्या प्राचीन भारत में ‘बाटनी ‘ नहीं ? अवश्य थे। हम भूलते जा रहे है। भगवन राम एक महान ‘बाटनी ‘ थे। और अहिल्या एक फासिल थी। महान बाटनी रामचंद्र ने अहिल्या फासिल का पता लगाया। वे आज के इन बाटीनियो से ज्यादा योग्य थे। ये लोग तो फॉसिल का सिर्फ पता लगाते है और उसकी जांच करते है। महान बॉटनी राम ने अहिल्या को फिर से स्त्री बना दिया। ऐसे ऐसे चमत्कारी बॉटनी हमारे यहाँ हो गए है। हम विश्व गुरु हैं। हमें कोई कुछ नहीं सिखा सकता।

इस पर भी खूब तालियाँ पिटीं और विदेशी विशेषज्ञ भी मान गए कि हमें कोई कुछ नहीं सिखा सकता

हरिशंकर परसाई

March 16, 2014 - Posted by | Uncategorized

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